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Wednesday, February 21, 2024

Budget 2023 Auto sector has high hopes for the next budget the government got these suggestions


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Budget 2023: इंडिया की जीडीपी में ऑटो सेक्टर का कॉन्ट्रीब्यूशन 6 प्रतिशत का है। डायरेक्ट और इंडायरेक्ट सेक्शन यह सेक्टर बड़ी संख्या रोजगार भी बनाता है। यही वजह है कि आम-बजट में ऑटो सेक्टर को लेकर क्या ऐलान होता है इसपर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। ऑटो सेक्टर को उम्मीद है कि सरकार की तरफ से जीएसट (इलेक्ट्रिक वाहनों पर) में कुछ छूट मिलेगी। आइए जानते हैं इस सेक्शन पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स की राय जान लेते हैं – 

शुगरबॉक्स के रिपुंजय बरारिया, सह-संस्थापक और सीटीओ, ने कहा-

गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पब्लिक क्लाउड संबंधी खर्च इस साल 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसने 2021 से 29 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है। इसके 2026 तक 13 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने का अनुमान है। आर्थिक और पर्यावरणीय हालात के कारण पूरी दुनिया में फ्लेक्सिबल डिजिटल तकनीकों को अपनाने पर मजबूती से ध्यान दिया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), विशेष रूप से क्लाउड टैक्नोलॉजी सेक्टर, को बदलाव की दिशा में पहले से अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। 

अगले आम बजट में सार्वजनिक और निजी संस्थानों के लिए एक स्थायी प्रणाली बनाकर, आईटी और क्लाउड टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में त्वरित विकास पर ध्यान केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता है। इस क्षेत्र को भारतीय टैक्नोलॉजी स्टार्ट-अप और उद्यमों के साथ-साथ मेक-इन-इंडिया से संबंधित टैक्नोलॉजी को बढ़ावा, समर्थन और प्रोत्साहन देने के लिए धन के समर्पित आवंटन और नए उपायों की आवश्यकता होगी। इस तरह समस्याओं को हल करने, रोजगार बढ़ाने और डेटा सुरक्षा के मुद्दों को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई देशी तकनीकों के विकास का रास्ता भी प्रशस्त होगा।

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आयुष लोहिया, सीईओ, लोहिया ऑटो ने कहा 

 भारत सरकार (जीओआई) ने ईवी इंडस्ट्री का समर्थन करने के लिए पिछले दशक में कई नई नीतियां और नियम पेश किए हैं, जैसे कि फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (फेम) प्रोग्राम, जिसे अब 2024 तक बढ़ा दिया गया है। विस्तार की सुविधा के लिए ग्रीन मोबिलिटी में विशेषज्ञता रखने वाले उद्यमों की, इंडस्ट्री को अभी भी देश भर में ईवी सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए एक इंटीग्रेटेड रणनीति की आवश्यकता है।

इसके साथ ही स्वदेशी ईवी उत्पादकों के लिए अतिरिक्त टैक्स ब्रेक जो अपने उत्पादों को भारत में बनाएंगे और “मेक इन इंडिया“ अभियान को तेजी से आगे बढ़ाएंगे। साथ ही इसको अपनाने की दर को प्रोत्साहित करने के लिए, इलेक्ट्रिक वाहनों के रिटेल फाइनेंसिंग को प्राथमिकता वाले लोन (प्रायोरिटी लेंडिंग) के तहत आना चाहिए। इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर को भी इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर की तरह 15,000 रुपये प्रति किलोवाट इंसेटिव मिलना चाहिए क्योंकि ईवी वाहनों के विस्तार में लागत सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। ये नए इंसेटिव भारत में इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर के लिए अपनी पैठ बढ़ाकर सड़कों पर यातायात को सहज और सुचारू बनाने में मदद कर सकती है।



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