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Monday, March 4, 2024

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Karakat Lok Sabha Seat: दक्षिण बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से जेडीयू के महाबली सिंह अभी सांसद हैं। इससे पहले रालोजद प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा यहां से सांसद रहे थे, हालांकि 2019 के चुनाव में उन्हें हार मिली थी। काराकाट सीट का नाम पहले बिक्रमगंज हुआ करता था। 2008 के परिसीमन के बाद इसका नाम काराकाट हो गया। तब से लेकर अब तक यहां तीन बार आम चुनाव हुए और तीनों में एनडीए ने कब्जा जमाया। खास बात ये है कि बीते तीन चुनावों में बीजेपी ने यहां चुनाव नहीं लड़ा। हर बार उसने यह सीट अपने गठबंधन के सहयोगी दल को ही दी है। इस सीट पर कुर्मी-कुशवाहा के अलावा सवर्ण वोटर भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

2024 के चुनाव से पहले जेडीयू महागठबंधन में चली गई है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की नई पार्टी रालोजद अब एनडीए के साथ है। आगामी चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच ही रहने वाला है। हालांकि, दोनों ही गठबंधन किन पार्टियों के प्रत्याशी यहां उतारेंगे, इसकी स्थिति अभी साफ नहीं हो पाई है। एनडीए से उपेंद्र कुशवाहा के लड़ने की संभावना ज्यादा नजर आ रही है। वहीं, महागठबंधन में जेडीयू या आरजेडी से कोई उम्मीदवार उतारा जा सकता है। 

काराकाट लोकसभा सीट का जातिगत समीकरण

पूर्व के सर्वे में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक काराकाट लोकसभा क्षेत्र में यादव, कुशवाहा, राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, दलित, महादलित, कुर्मी, वैश्य और मुस्लिम मतदाता प्रमुख हैं। सबसे ज्यादा यहां यादव वोटर्स हैं, जिनकी संख्या 3 लाख से भी ज्यादा है। इसके अलावा सवर्ण मतदाता भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इस सीट पर राजपूत करीब 2 लाख, वैश्य 2 लाख, ब्राह्मण 75 हजार, भूमिहार समाज के 50 हजार वोटर हैं। इसके अलावा कुशवाहा और कुर्मी मतदाताओं की संख्या मिलाकर करीब ढाई लाख है। इस सीट पर मुस्लिम वोटर्स भी खास पैठ रखते हैं, जिनकी संख्या करीब डेढ़ लाख है। 

2019 के चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा को गंवानी पड़ी थी काराकाट सीट

लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी लहर के चलते उपेंद्र कुशवाहा को अपनी सीट गंवानी पड़ी थी। 2014 में एनडीए के साथ रहकर काराकाट से सांसद बने कुशवाहा ने 2019 का चुनाव महागठबंधन में रहकर लड़ा था। हालांकि, उन्हें जेडीयू के महाबली सिंह से हार का सामना करना पड़ा। महाबली सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा को करीब 84 हजार ज्यादा वोटों के अंतर से मात दी थी।

2014 में उपेंद्र कुशवाहा काराकाट से जीते और केंद्र में मंत्री बने

लोकसभा चुनाव 2014 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। बीजेपी ने यह सीट रालोसपा को दी। उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के प्रत्याशी के रूप में लड़े और उन्होंने आरजेडी के कांति सिंह को एक लाख से भी ज्यादा वोटों से हरा दिया। वहीं, जेडीयू के महाबली सिंह तीसरे नंबर पर रहे। इससे पहले 2009 के आम चुनाव में महाबली सिंह यहां से जीतकर सांसद बने थे। 

काराकाट लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें, पांच पर आरजेडी का कब्जा

काराकाट लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें रोहतास जिले के नोखा, डेहरी, काराकाट और औरंगाबाद जिले के गोह, ओबरा, नबीनगर शामिल हैं। इन सभी में महागठबंधन का दबदबा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में नोखा, डेहरी , गोहर, ओबरा और नबीनगर में आरजेडी ने जीत दर्ज की थी, जबकि काराकाट विधानसभा पर भाकपा माले ने कब्जा जमाया था। 

2024 चुनाव से पहले कुशवाहा फिर एनडीए में, काराकाट में क्या रहेंगे समीकरण?

आगामी आम चुनाव से पहले बिहार में सियासी समीकरण काफी बदल गए हैं। जेडीयू एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन में चली गई है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा जो पिछले चुनाव में यहां से रालोसपा के टिकट पर महागठबंधन से लड़े थे, उन्होंने बाद में अपनी पार्टी का जेडीयू में विलय कर दिया था।

हालांकि, इस साल की शुरुआत में उपेंद्र कुशवाहा फिर से जेडीयू से अलग हो गए और रालोजद नाम से नया दल बना लिया। अब उन्होंने आगामी चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर लड़ने का ऐलान किया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 2024 में एनडीए से यहां उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का उम्मीदवार उतारा जा सकता है। वहीं, महागठबंधन में आरजेडी और जेडीयू के बीच काराकाट सीट पर लड़ने को लेकर माथापच्ची हो सकती है।

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